Wednesday, 28 March 2012

अपना नेहरु प्लेस


दक्षिण दिल्ली का नेहरु प्लेस कम्प्यूटर और आईटी के अन्य उत्पादओं को एशिया का सबसे बङा और अनोखा बाजार है। सही मायने में कहें तो नेहरु प्लेस कम्प्यूटर की मंडी है,जहाँ कम्प्यूटर और संबंधित उपकरणों के दाम तय होते और पल-पल बदलते भी रहते है।इस बाजार में जुङी लगभग हर नई-पुरानी और असली-नकली चीजें मिलती हैं।यहाँ एचपी,लेनेवो,सोनी,काँम्पेक जैसी कंपनियों के शोरुम है और साथ ही कम्प्यूटर की अनाधिकृत दूकानें भी हैं।नेहरु प्लेस में आईटी से जुङे करीब 2,000 कारोबारी हैं जो मुख्य बाजार के भू-तल और प्रथम तल की दुकानों में फैले हैं।इस बाजार में पार्किंग,खान-पान और सभी कारोबारों को मिलाकर करीब पचास हजार लोगों को रोजगार मिलता है।एक अनुमान के मुताबिक नेहरु प्लेस में सालाना करीब 3,000करोङ रुपये का कारोबार होता है।वहाँ पहली बार जाने वाले ग्राहकों के लिए पूरे बाजार की चाल को समझना आसान नहीं है।
पिछले नौ वर्षों से नेहरु प्लेस में माल खरीदने आ रहे सोनू कौल पहले आईटी से जुड़ी एक छोटी कंपनी में सेल्स का काम करते थे। रोज आते जाते नेहरु प्लेस में संपर्क बने और अब वह अपने साथी के साथ आईटी कंपनी गुड साँल्यूशन तना रहे है और उसकी मार्केटिंग खुद ही देखते है।सोनू की पढाई विज्ञान या कम्प्यूटर से जुङी किसी भी शाखा से जुङी नहीं है,लेकिन वह कम्प्यूटर की हार्ड डिस्क ,रैम,मदर बोर्ड आदि के बारे में काफी अच्छी जानकारी रखते हैं।
  आशु यूपी के गोरखपुर का रहने वाला है और 23 साल का है।आशु करीब सात साल पहले अपने मामाजी का पास नेहरु प्लेस के कम्प्यूटर के एक बङे डिस्ट्रीब्यूटर के गोदाम में मजदूरी करने आया था।रात को वहीं पटरी पर सोता था।फिर एक रात उसने कार्टरेज में स्याही भरते हुए कुछ लङकों को देखा और उन्हीं से काम भी सीखा।फिर उसने पटरी पर ही स्याही भरने का काम शुरु कर दिया जिसमें स्याही लाकर देने वाला आधा हिस्सा ले लेता था।अब दो साल से यहीं अपना काम कर रहा है।नेहरु प्लेस की ओसियान बिल्डिंग में दूसरे माले पर न्यू स्टार सिस्टम के गौरव गुप्ता से पता लगा कि कैसे दामों में उतार-चढाव होता है।गुप्ता ने एलएलबी की है,लेकिन पिछले आठ वर्षों से कम्प्यूटर हार्डवेयर का कारोबार कर रहे है।    
    उनका कहना है कि नेहरु प्लेस में एक अंदरुनी फोन की लाइन है, जिसे छोटी लाइन कहते हैं। इससे लगभग सभी स्थानीय कारोबारी जुड़े हुए हैं। अब अगर बाजार में किसी उपकरण की माँग आती है तो तुरंत ही सब तक खबर पहुँच जाती है। चूँकि हर माल सबसे पास नहीं होता है, तो इसके जरिए संपर्क करने में आसानी रहती है और कहीं से भी माल ला कर ग्राहक को दिया जाता है। हालांकि कई बार कुछ दुकानदार माल की कमी होने पर दाम बड़ा भी देते हें। गुप्ता जी का कहना है बाजार में करीब 50 से 60 फीसदी ग्राहक तो जान पहचान से ही आतें हैं, जो नेहरु प्लेस जैसे बाजार के लिए जरुरी भी है।
  

No comments:

Post a Comment